Decolonizing Indian Minds (भारतकी मानसिक स्वतंत्रता)

हम जानते है की हम १९४७मे स्वतन्त्र हुए, लेकिन बौद्धिक रूपसे और मानसिक रूपसे हम अभी भी गुलाम (colonized) है.  इसके प्रमाण है, जैसे:

१. हमें पश्चिमी देशोंसे आती वस्तु ज्यादा आकर्षक और बिना प्रमाण ही श्रेष्ठ लगती है : पुस्तक, फिल्म, विचार या व्यक्ति.

२. English भाषा जाननेवाले और fluently बोलनेवाला व्यक्ति हमें ज्यादा प्रभावित करता है. ‘देशी’ शब्द जैसे एक हीनभाव से प्रयोग किया जाता हैं.

पश्चिमसे हम लघु है यह भावना दूर करनेके जरूरत है.  पश्चिमके देशोंने हमारे पाससे बहुत कुछ लिया है और आज भी बहुत ले रहे है और वे चीज़े repackaging करके हमारे पास आती है जैसे Yoga, आयुर्वेद, Mind sciences वगैरह।  मध्यकालमे यूरोपके देशोंमें भारतका समुद्रमार्ग ढूंढने के इतनी आतुरता क्यों थी?  क्योके उन्हें भारत और चीन से आनेवाले अनेकानेक वस्तुओ के बिना नहीं चल सकता था और ओटोमन राज्यने मध्य एशिया पर कब्ज़ा करके ज़मीन के रस्ते चलते व्यापारमें बाधा पैदा कर दी थी.  यह जानना जरूरी है की भारत का व्यापार उस समय भी अफ्रीकन देशोंके साथ तो समुद्रमार्ग से चलता ही था और वास्को डी गामाको अफ्रीका से भारत आनेमे एक गुजराती व्यापारीने ही मदद की थी.

Vasco Da Gama

उस समय से पहलेभी अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मुक्तरूप से चलता था, जब की यूरोपीय देशोंने अन्य देशोंको colonize  करके व्यापार पर नियंत्रण किया उतना ही नहीं, परन्तु उन देशोंको तबाह किया. Caste सिस्टमको भारतीय समाज और मनमे ब्रिटिशअफसर Sir Herbert Hope Risley ने 1901 sensus द्वारा ज्यादा दृढ बनाया. आर्य बहार से भारत आये थे और द्रविडोका दमन किया वगैरह Max Muller नामके Britain में करियर बनननेवाले विद्वानके दिमाग की देन थी.

Sir Herbert Hope Risley
Max Muller

ऐसी बातें मानसिक रूपसे गुलाम बने भारतके लोगोके दिमागमे गहराई तक ये बसी हुई है और आज भी भारतकी एकता के लिए समस्या बानी हुई है. तो भारत को मानसिक रूपसे स्वतन्त्र होनिकी और आत्मसम्मान जगानेकी जरूरत है.

जय भारत!

The article is based on following You tube video…

Published by Dr. J. R. Mehta

A faculty at Mechanical Engineering Department at Faculty of Technology and Engineering, The Maharaja Sayajirao University of Baroda, Vadodara. Area of interest: Air Conditioning, Energy, and Heat Transfer.

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